पति-पत्नी का रिश्ता राम-सीता की तरह अटूट रहेगा, अगर दोनों अपनाएं ये 5 सूत्र

पति-पत्नी का रिश्ता राम-सीता की तरह अटूट रहेगा

पति-पत्नी का रिश्ता राम-सीता की तरह अटूट रहेगा, अगर दोनों अपनाएं ये 5 सूत्र

हर महिला श्री राम जैसा पति चाहती है और हर पुरुष मां सीता जैसी पत्नी चाहती है लेकिन कोई भी उनकी तरह अपने रिश्ते को मजबूत करने का प्रयास नहीं करता है। वे उन वार्तालापों को समझने की कोशिश नहीं करते हैं जो साथी के साथ बंधन को मजबूत करने के लिए सबसे जरूरी हैं।

पति-पत्नी का रिश्ता राम-सीता की तरह अटूट रहेगा अगर ये करो गए तो भगवान श्रीराम और मां जानकी के बीच का बंधन हर जोड़े के लिए सिख है। उनसे यह समझा जा सकता है कि भले ही बुरी परिस्थितियों के कारण शारीरिक रूप से एक साथ रहना संभव न हो, लेकिन भावनात्मक रूप से जुड़े रहने की महान बात आपको एक दूसरे से अलग नहीं कर सकती। इसमें कोई शक नहीं है कि हर पति-पत्नी अपने रिश्ते को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखना चाहते हैं।

लेकिन इसके लिए सही दिशा में प्रयास करने की समझ के बिना, रिश्ता अक्सर एक अलग रूप में बदल जाता है। एक ऐसे रिश्ते में जिसमें न प्यार होता है और न ही कोई सम्मान होता है।

एक दूसरे का आदर करें

पति-पत्नी में एक-दूसरे के प्रति आदर होना बहुत जरूरी है। इसके महत्व को श्रीराम और माता सीता के रिश्ते से बहुत आसानी से समझा जा सकता है। दोनों ने कभी एक दूसरे का अपमान नहीं किया। साथ ही एक-दूसरे के हर फैसले का सम्मान किया।

अपने मन की बात कहें

अपने रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए, यह आवश्यक है कि पति-पत्नी समय निकालकर अपने विचारों और भावनाओं को खुले दिमाग से एक-दूसरे के साथ साझा करें। मुझे एक-दूसरे के सामने खुलकर सुनें और समझने की कोशिश करें। एक-दूसरे को इतना सहज महसूस कराएं कि किसी को कुछ भी छिपाने की जरूरत न पड़े।

एक दूसरे पर भरोसा करो

पति-पत्नी का रिश्ता लंबे समय तक ही मजबूत रहता है, जब तक दोनों का एक-दूसरे पर गहरा भरोसा होता है। इसलिए जरूरी है कि दोनों रिश्ते में कुछ भी न छिपाएं, अपना वादा निभाएं, एक-दूसरे के अच्छे-बुरे समय में साथ खड़े रहें। रिश्ते में एक-दूसरे को सुरक्षित महसूस कराने के लिए प्रयास करें।

पार्टनर के साथ ईमानदार रहें।

ईमानदारी वह आधार है जिसके द्वारा विश्वास और संबंध घनिष्ठ होते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप कठिन बातचीत के दौरान भी अपने साथी के साथ ईमानदार रहें। अपनी गलती पर विश्वास करें और सामने वाले व्यक्ति को अपनी गलती के बारे में खुलकर बताने दें। इससे रिश्तों में सुधार होता है।

पतिव्रता का धर्म निभाना

माता सीता ने अपने जीवन भर पतिव्रता होने का धर्म निभाया हे । रावण द्वारा सीता माता का हरण के बाद भी माता सीता ने अपनी इज्जत पर आंच न आने दी और अंत तक रावण के सामने न झुकीं।  दोनों के बीच बहुत  दूरियों के बाद भी माता सीता और श्रीराम जी  का एक दूसरे के लिए प्रेम और वैवाहिक धर्म जस का तस बना रहा।

पत्नी की सुरक्षा सबसे पहले करे

रावण माता सीता के हरण के उपरांत जितनी विचलित माता सीता थीं, उतने ही व्याकुल श्री राम भी थे ये आपको तो पता होगा । अपनी पत्नी के सम्मान के लिए उन्होंने युद्ध कर सभी राक्षसों का विनाश किया था । श्री राम  चाहते तो हनुमान जी के जरिए  माता सीता को वापस ला सकते थे, लेकिन वह एक पति के रूप में अपनी पत्नी को बचाने के लिए प्रतिबद्ध थे और औ खुद गए ।

पति-पत्नी का रिश्ता राम-सीता की तरह अटूट रहेगा अगर हर दिन एक साथ प्रयास करेंगे तो

एक मजबूत रिश्ते के लिए दोनों पति-पत्नी के लिए निरंतर प्रयास करना बहुत आवश्यक है। क्योंकि पौधों की तरह ही रिश्ता धीरे-धीरे बढ़ता है। इसलिए पति-पत्नी एक-दूसरे के व्यक्तिगत और रिश्ते के विकास के लिए मिलकर प्रयास करते हैं।

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